arvind pandey

arvind pandey 

मैं न चाहता युग-युग तक पृथ्वी पर जीना
पर उतना जी लूँ जितना जीना सुंदर हो
मैं न चाहता जीवन भर मधुरस ही पीना
पर उतना पी लूँ जिससे मधुमय अंतर हो
मानव हूँ मैं सदा मुझे सुख मिल न सकेगा
पर मेरा दुख भी हे प्रभु कटने वाला हो
और मरण जब आवे तब मेरी आँखों में
मेरे ओठों में उजियाला हो I।
महज 28 साल की उम्र में संसार को अलविदा कह गए, गढ़वाल की पावन माटी के उच्चकोटि के कवि चन्द्रकुंवर बर्त्वाल जी की जयंती पर उन्हें सादर श्रद्धांजलि।
चन्द्र कुंवर बर्त्वाल जी का जन्म उत्तराखण्ड के रुद्रप्रयाग जिले के ग्राम मालकोटी, पट्टी तल्ला नागपुर में 20 अगस्त 1919 में हुआ था। उन्होंने अल्पायु में ही हिंदी साहित्य को अनमोल कविताओं का समृद्ध खजाना दे दिया था। समीक्षक चंद्र कुंवर बर्त्वाल को हिंदी के 'कालिदास' मानते हैं। उनकी कविताओं में प्रकृतिप्रेम झलकता है।

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